Gaurav Kumar Dubey   (गौरव कुमार)
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जीवन का आधार प्रेम है
Joined 11 April 2017


जीवन का आधार प्रेम है
Joined 11 April 2017
Gaurav Kumar Dubey 18 APR AT 8:53

एक पीढ़ी का अंतर है जो आज तुम्हें बतलाते हैं
आंखों में पलने वाले, सपने, आँशु खा जाते हैं ।।
कुछ रिश्ते नानी वाले, किस्सों में जिंदा रहते हैं
कुछ नानी नाना जिंदा होकर के भी मर जाते हैं ।।

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Gaurav Kumar Dubey 13 APR AT 14:09

आँख ने ख्वाब को छल लिया है।
शब्द ने भाव को छल लिया है।
हम जीयें दर्द लेकर के कब तक
जिस्म ने घाव को छल लिया है।

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Gaurav Kumar Dubey 11 APR AT 22:45

तुमने मुझको पहचान लिया।

मैं ऐसा हूँ, मैं वैसा हूँ
जाने मैं कैसा कैसा हूँ
होठों पर आखिर सच आया
नजरों में तुम्हारी जैसा हूँ
होते हैं मुखोटे चेहरों पर
चेहरों पर चेहरे होते हैं
सच तक कैसे पहुंचे कोई
जब झूठ के पहरे होते हैं
भृम था जो था अब पता चला
अब तक झूठा सम्मान लिया
तुमने आखिर पहचान लिया।।।।।

जैसा भी तुमने कहा मुझे
मैं सचमुच बिल्कुल वैसा हूँ
तुम गलत कभी भी रही नहीं
मैं जाने कैसा कैसा हूँ
हाँ, हूँ मैं गलत, मैं हूँ खराब
मेरी सोच गलत मैं खुद खराब
मैं नहीं हूँ तो बन जाऊँगा
जैसा तुमने अब मान लिया
तुमने मुझको पहचान लिया......

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Gaurav Kumar Dubey 7 APR AT 21:17

पाँव पर एक पाँव जो तुमने उचक कर रख दिया
आँधियाँ चलने लगीं मौषम बदल कर रख दिया

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Gaurav Kumar Dubey 4 APR AT 22:59

तुम्हें भूलने की तमन्ना बहुत है,
तवारूफ़ यही है भुलायेंगे कैसे।।
गज़लें ये नज्में तुम्हारे लिए हैं,
मसला यही है, सुनाएंगे कैसे।।

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Gaurav Kumar Dubey 24 MAR AT 18:23

हम सुलह के रास्ते पाने क्षमा बढ़ते रहे
किंतु नित नए वो दोष ढूंढ के मढ़ते रहे

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Gaurav Kumar Dubey 10 MAR AT 20:12

हर चार कदम पर रुक जाना
बिन गलती के ही झुक जाना
बन गए दोस्त तो आम है ये
सुख देकर अपने, दुख पाना
झुकते- झुकते, रुकते-रुकते
जब कमर अकड़ने लगती है
तो अर्थ तो क्या परिभाषा भी
रिश्तों की बदलने लगती है।।

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Gaurav Kumar Dubey 8 MAR AT 23:34

मन से चाहा मगर मन की मन में रही,
मन्त्र से बन्धनों को न स्वर मिल सके।
क्या हुआ जो न अग्नि हुई साक्षी, क्या जो
जन्म और कुंडली में न हम मिल सके।।

पाणिं न हो सका जो ग्रहण क्या हुआ
साथ फिर भी नहीं साथ से दूर है।
अंजुरी पर जो रख न सकी अंजुरी
हाथ फिर भी नहीं हाथ से दूर है।
प्यार था, प्यार है, और रहेगा सदां
क्या हुआ जो धरा से न नभ मिल सके।
मन से चाहा......

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Gaurav Kumar Dubey 17 FEB AT 10:30

सीस के बिना ही धड़ लौटाए थे माताओं को
इस बार माँओं को न धड़ भी दे पाए हैं
इंच इंच नाप के जो ले गए थे बेटे आप
इंच इंच होके कटोरों में शव आये हैं
पाक के नापाक मंसूबों को पीछे देख लेंगे
पहले वो जो भेड़ियों को घर में छिपाए हैं
चौराहे पे गोलियाँ उतार देना उनमें जो
बोलने से पहले अपनी शर्म बेच खाये हैं

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Gaurav Kumar Dubey 17 FEB AT 10:21

हाथ में कलम थाम सोचता रहा सदां मैं।
कैसे लेखनी का कर्ज हम तो चुकाएंगे।।
सीमाओं पे मरते हैं देश के जवान और।
यहाँ हम पायलों पे लिखे गीत गाएंगे।।
देश प्रेम से बड़ा तो कोई भी नहीं है प्रेम।
चंद्रवरदाई की परंपरा निभाएंगे।।
मातृभू से प्रेम जो किया है वक़्त आ गया है
जान दे जहान के ही मान को बढाएंगे।।

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