Deepshikha S J   (~© The Perpetual Inkpot)
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Joined 20 February 2017


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Deepshikha S J AN HOUR AGO

छत हो सिर पर या
खुला आसमान,
फ़र्क नहीं पड़ता ।
मेहनत में थका
जिस्म हो,
सुकून में बंद हो
मेरी बेख़ौफ़ आंखें,
वो आज़ादी ।

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*२३ मार्च : शहीदी दिवस विशेष*
#आज़ादी
#collab #yqdidi
#theperpetualinkpot

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Deepshikha S J YESTERDAY AT 8:06

अपनी बहादुरी के किस्से क्या सुनाऊं?
मेरे लिए हर वो सड़क सुनसान थी,
जिसमें तू मेरे साथ न था ।

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Deepshikha S J 16 MAR AT 22:58

एक क़दम की दूरी पर
ही खड़ी हो वो, कौन जाने?
राह देखी जिसकी बरसों
वो अगले ही मोड़ पर खड़ी हो, कौन जाने?

इतना आगे आकर पलट जाना
अब गुनाह होगा,
जब उसके ही नाम का सहरा है पहनना,
तो पीछे हटना
उस सुंदर स्वपन के साथ दगा होगा ।

कौन जाने हाथों में रचा बैठी हो
वो भी मेहंदी तुम्हारे नाम की?
बस एक क़दम की दूरी पर
आंखें बिछाए बैठी हो वो, कौन जाने?

तुम्हारी विजय भी लालायित हो
तुम्हारे स्पर्श को, कौन जाने?

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Deepshikha S J 8 MAR AT 23:24


* सोच : महिला दिवस विशेष*

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Deepshikha S J 6 MAR AT 0:53

He stopped loving her,
she thought.

He lost her,
she learnt.

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Deepshikha S J 1 MAR AT 0:43

अपने लफ्ज़
लोगों पर ज़ाया नहीं करती ।
लेखिका हूं ।

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Deepshikha S J 25 FEB AT 10:29

फिर कभी पलट कर
उससे कुछ न पूछा ।
पर मैंने सब सुना ।

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Deepshikha S J 19 FEB AT 21:01

शायद अब खुश होंगे सभी
जिन्हें शिकवे थे मेरी चाहतों से ।
उदास गर हों भी तो अब मैं बहुत दूर आ गया हूं ।

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Deepshikha S J 18 FEB AT 23:17

हे ईश ! मेरी भक्ति का,
कुछ तो इनाम दे ।
मेरी भी उम्र दे उसे
जिसमे बसते हैं मेरे प्राण रे ।
बखूबी समझती हूं
तेरी सृष्टि के नियम भी,
इसलिए मांग रही उसका जीवनदान नहीं ।
बस मरणोपरांत देह हो, मेरी ,
उसके मज़बूत कंधो पर ,
इतना सा वरदान दे !

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Deepshikha S J 18 FEB AT 2:55

कई आए और चले गए
कसमें - वादे किए हज़ार ।
मौसम बदला तब
समझा मैं,
दोषी नहीं जो
छोड़ गए बीच मझदार ।
वो मौसम थे,
हमारा प्रेम तूफ़ान,
और मैं ,
चट्टान ।

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