brijesh bairwa   (Gulaal)
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hindi writer. And kagz youtuber. Nd my name is gulal.😍
Joined 19 May 2018


hindi writer. And kagz youtuber. Nd my name is gulal.😍
Joined 19 May 2018
brijesh bairwa 18 MAY AT 21:32

कभी हँसे, कभी आहें भरी, तो कभी रोना सीख लिया
ऐ ! नसीब तुझे पाने में, अपने आप को खोना सीख लिया

चहलकदमी से अलग , चित शांत हो गया
वीरां हुईं सड़क कदम थमे, खड़े रहकर अफ़साना सीख लिया

आंसूओ ने जगह ढूँढी, जज्बातों के सैलाब खत्म हुए
आँखों ने प्रतिबिंब तेरा देखा, दिल ने मचलना सीख लिया

दलीलों में दफन हो चले, वो महकती साँसें गुम हो चली
लपटों से भरी गर्मी में, बदन ने जलना सीख लिया

पाकर खोया हूँ, मैं तुझको मेरे गुलाल
लफ्जों का लहू निकाला, दर्द में जीना सीख लिया

सलाखों में कैद है खजाना मेरा, चाबी मेरे ही पास है
बस भूल गया हूँ कही उसे, ढूंढ़ना सीख लिया


ख्वाहिशें बिखर गई,ओस की बूँदों तरह
तेरे बिन पूरा तो नहीं मै, बस अधूरा रहना सीखा लिया

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brijesh bairwa 4 MAY AT 21:54

सवाल ऐ सियासत का खौफ उतार दिया जाए
जख्म के कातिलों को दोस्ती का अवतार दिया जाए

किफ़ायती दरों पर अहसान बिक गये हैं
चलो, अब हिंदुस्तान को बदल कर भी पाकिस्तान बना दिया जाए

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brijesh bairwa 25 APR AT 17:08

कभी नफ़रत, कभी क्रोध, ना कभी खुद्दारी नजर आई
मेरे अपनेपन को तो आँधी भी ना रोक पाई..

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brijesh bairwa 17 APR AT 20:07

ऊंचे बरख्तों से उतर कर के आ
नापना है, दिल मेरा तो मेकअप उतार करके आ

होश-ए - हवा पर झुलाता है, सफर मेरा
मुझसे मिलना है तो फटी जींस पहन करके आ
मै रोज गंदे कपड़े पहनता हूँ, तुझे क्या
जा जा फिर से आईना निहार कर के आ

मेरी खाली जेब में, भले ही वजन नहीं है
वजन चाहिये तो मेरे दोस्तो के दिल नाप कर के आ
मन का मौजी हूँ, हरपल खुश रहता हूँ
वजह जाननी है, तो मेरे चले रास्ते पे चल कर के आ

सोने की थाली फकीर नहीं खरीदता
मुझसे दोस्ती करनी है, तो पैदल चल करके आ
'गुलाल'की वास्तविकता देखनी है, तो
जा कड़क धूप में, रेगिस्तान की धूल छान कर के आ......

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brijesh bairwa 16 APR AT 15:48

'' दर्द मीठा है, रुक रुक कर कसक जान पड़ती हैं
यादें गहरी है, थम थम के आँखों से बरस पड़ती है
मै लिबास ओढ़ा, वो मुसाफ़िर हूँ
जिसकी लौ, अँधेरे में टूट पड़ती है ,,

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brijesh bairwa 30 MAR AT 10:37

ऐ जिंदगी कितना जलील करेगी तू
घाव भरेगी या ओर गहरा करेगी तू

दीवारें सुनसान है, मुश्किलों का साया है
लोहा भट्टी में सुर्ख लाल हो गया है
उस वक़्त क्या करेगी तू
ठंडा होने देगी या ओर लाल करेगी तू

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brijesh bairwa 19 MAR AT 11:20

कौन था वो, जो इस बेगैरत शहर में
मुझको अपना बता गया
सुकूं-ए-दिल बेबसी का मकां बता गया........

अपना बचपन का दोस्त बुलाता था मुझको,
वो दुनिया में मौहब्बत से मौहब्बत फैलाने का तिलिस्म जला गया

विना बजह का हक जताता था मुझ पर
उसका प्यार ना चाहते हुए भी, सिसक मेरे सीने पे आ गया

हर कहानी की तरह, दिलकश नहीं थी हमारी बातें,
फिर भी विना कहे मेरी साँसों की महक जुटा ले गया

भूल से भी कभी होली नहीं खेली मेरे साथ उसने
फिर क्यूँ वो मेरे सूखे गालों पर गुलाल लगा गया........

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brijesh bairwa 15 MAR AT 20:46

जो आदमी जिस दर्द में जीता है,
वो दर्द, उसे दर्द नहीं देता....

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brijesh bairwa 11 MAR AT 16:50

कोन हो, मुझे पहचानती हो क्या
ऐसे क्यूँ देखती हो, मुझे अपना कोई मानती हो, क्या

फ़लक पर रोशनी में ख्वाहिशें कैद है
जुगनुओं से इश्क लड़ाना जानती हो, क्या

परिंदे थक कर चूर है मंजिल के सामाने,
पत्थर पे लकीर मुश्किल है, मानती हो क्या

ख्वाहिशें बुझ गई किसी ओर के इश्क में
समंदर में नदी का दरिया बनाना जानती हो क्या

ये आँखें भारी है आप की
ठंडी हवाओं के फिकर में रात भर जागती हो क्या

चेहरा क्यूँ मोड़ लेती हो
गुलाल किसी को लगाना जानती हो क्या

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brijesh bairwa 5 MAR AT 16:16

तुम चमकती चक्षु में चश्मगी चीराग हो , क्या?
बताओ ना, प्रेमल पुष्पित लता का तुम कोई पराग हो क्या?

अलसाई सी योवना, कुसुम बरेली या प्यार की बेली,
ममत्व सी सटी, वटवृक्ष पर सजी, तुम कोई श्रंगार हो क्या?
प्रतिपल इठलाती बलखाती किसी का प्यार हो क्या ?

बताओ ना, आज खामोशी है उपवन में,
मधुप सी, तुम बीमार हो क्या ?...........

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