brijesh bairwa   (Gulaal)
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Joined 19 May 2018


Joined 19 May 2018
brijesh bairwa 19 MAR AT 11:20

कौन था वो, जो इस बेगैरत शहर में
मुझको अपना बता गया
सुकूं-ए-दिल बेबसी का मकां बता गया........

अपना बचपन का दोस्त बुलाता था मुझको,
वो दुनिया में मौहब्बत से मौहब्बत फैलाने का तिलिस्म जला गया

विना बजह का हक जताता था मुझ पर
उसका प्यार ना चाहते हुए भी, सिसक मेरे सीने पे आ गया

हर कहानी की तरह, दिलकश नहीं थी हमारी बातें,
फिर भी विना कहे मेरी साँसों की महक जुटा ले गया

भूल से भी कभी होली नहीं खेली मेरे साथ उसने
फिर क्यूँ वो मेरे सूखे गालों पर गुलाल लगा गया........

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brijesh bairwa 15 MAR AT 20:46

जो आदमी जिस दर्द में जीता है,
वो दर्द, उसे दर्द नहीं देता....

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brijesh bairwa 11 MAR AT 16:50

कोन हो, मुझे पहचानती हो क्या
ऐसे क्यूँ देखती हो, मुझे अपना कोई मानती हो, क्या

फ़लक पर रोशनी में ख्वाहिशें कैद है
जुगनुओं से इश्क लड़ाना जानती हो, क्या

परिंदे थक कर चूर है मंजिल के सामाने,
पत्थर पे लकीर मुश्किल है, मानती हो क्या

ख्वाहिशें बुझ गई किसी ओर के इश्क में
समंदर में नदी का दरिया बनाना जानती हो क्या

ये आँखें भारी है आप की
ठंडी हवाओं के फिकर में रात भर जागती हो क्या

चेहरा क्यूँ मोड़ लेती हो
गुलाल किसी को लगाना जानती हो क्या

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brijesh bairwa 5 MAR AT 16:16

तुम चमकती चक्षु में चश्मगी चीराग हो , क्या?
बताओ ना, प्रेमल पुष्पित लता का तुम कोई पराग हो क्या?

अलसाई सी योवना, कुसुम बरेली या प्यार की बेली,
ममत्व सी सटी, वटवृक्ष पर सजी, तुम कोई श्रंगार हो क्या?
प्रतिपल इठलाती बलखाती किसी का प्यार हो क्या ?

बताओ ना, आज खामोशी है उपवन में,
मधुप सी, तुम बीमार हो क्या ?...........

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brijesh bairwa 2 MAR AT 19:52

सुलग कर आग अब जिंदगी राख बन गई मेरी
गहरी नींद में मौत भी आ जाए तो फर्क नही पड़ता,

दूँगा जरा समझ कर जबाब उसको,
अहबाब, वो जहर देकर सुला जाये तो फर्क नही पड़ता,

सख्त रस्तों पे चलू तो आसां लगे मुझको,
मंजिलें ख़त्म भी हो जाये तो फर्क नहीं पड़ता,....

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brijesh bairwa 26 FEB AT 20:44

मुरीद हूँ लवों का, जन्नते अहबाब रखता हूँ
हाँ, दोस्त हैं कम, पर लाजबाब रखता हूँ ।।

समझ ना सको तुम मुझे, बस एक बात,
आँखों में खुशी, हथेली में प्यार रखता हूँ

यार! मैं गुलाल हूँ, यानी प्यार की निशानी।
मैं अपनी पहचान अपने आप रखता हूँ।।

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brijesh bairwa 21 FEB AT 13:55

खामोशी हर शिकंजे की तलाश में डूबी क्यूँ है
कुछ लोगों में अपनेपन के तव्वशुम की खूबी क्यूँ हैं

उनका पास आना भी दिल को कशोट जाता है
हंसती आंखों से आंसू निकल जाता है.......

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brijesh bairwa 9 FEB AT 9:01

ना थी कोई बात, ना किचड़ में कमल था,
'यार तू सही बोलता था'
उसे पसंद थी शोखियां
मुझे सादगी में अमल था......

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brijesh bairwa 4 FEB AT 14:13

" ना जाने कितनी दुआ
कितना प्यार साथ ले जाएंगे,

लोग झूठ बोलते है की खाली हाथ आये थे
ओर खाली हाथ चले जाएंगे.... ,,

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brijesh bairwa 2 FEB AT 18:49

देख कर मेरी चाहत को अक्सर तराजू टूट जाते हैं,
गुमनाम आशिकी में बैठे, हमशाही,
जैसे हम कुछ कहते हैं, तो आप रूठ जाते है,

ये आँखों शराबी है, आप की ढोये गुंजार आशिकी का
अगर कर ले दीदार, तो अच्छे अच्छो के छक्के छुट जाते है....

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