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I have pages which speaks out my Voice.

#Pages#Yqbaba

आज फिर मस्ती और मज़ाक के बीच,
शब्दों के मायाजाल से,
एक औरत की इज्जत उछाल दी गई।

#words#yqbaba#yqhindi

He wore my slippers to respect my Ideologies.

#Slippers#yqbaba

सुना है मेने, अपनी जिंदगी स्वयं की रची नादानी है।
राम और रावण ने भी,
स्वयं ही रची वो कहानी है।
कौन भला और किसकी क्या है कला,
सभी फूल एक ही वृक्ष में है खिला।

हर एक फूल की अलग है ख़ासियत,
जो ये पहचाने, उसकी महक दे सही हिदायत।
कई फूल खिले और मिट्टी में मिल गए,
कई उस गुलाब की तरह थे जिसकी महक आज भी किताबों के पन्नों में खिल गई।

मिट्टी से जनमी, मिट्टी में मिल जाने पर भी आज अपनी महक से उन हसीन लम्हें को इतीहास 
बना गई।
कई फूल खिल कर भी मुर्छित हैं।
उनका वृक्ष पर होना केवल एक बोझ बन गई।

आज खिला गुलाब तो कल खिल उठेगा गुड़हल,
आज गेंदा तो कल रजनीगंधा।
बस रह जाती है तो वो महक।

इसी तरह मनुष्य की मौत उसके सोच से जुड़ी है।
हर सोच के साथ एक नई कड़ी जुड़ी है।
सोच की मृत्यु यानी अस्तित्व का अंत।
मृत्यु भी हमारी रची गई है एक ग्रंथ।

#death#thoughts#flowers#yqbaba#yqdidi

In the journey of finding myself, it was my scattered dream that joined and paved the way for my success.

#Join#yqbaba#pic credit: google