Bhawana Kedia

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सुना है मेने, अपनी जिंदगी स्वयं की रची नादानी है।
राम और रावण ने भी,
स्वयं ही रची वो कहानी है।
कौन भला और किसकी क्या है कला,
सभी फूल एक ही वृक्ष में है खिला।

हर एक फूल की अलग है ख़ासियत,
जो ये पहचाने, उसकी महक दे सही हिदायत।
कई फूल खिले और मिट्टी में मिल गए,
कई उस गुलाब की तरह थे जिसकी महक आज भी किताबों के पन्नों में खिल गई।

मिट्टी से जनमी, मिट्टी में मिल जाने पर भी आज अपनी महक से उन हसीन लम्हें को इतीहास 
बना गई।
कई फूल खिल कर भी मुर्छित हैं।
उनका वृक्ष पर होना केवल एक बोझ बन गई।

आज खिला गुलाब तो कल खिल उठेगा गुड़हल,
आज गेंदा तो कल रजनीगंधा।
बस रह जाती है तो वो महक।

इसी तरह मनुष्य की मौत उसके सोच से जुड़ी है।
हर सोच के साथ एक नई कड़ी जुड़ी है।
सोच की मृत्यु यानी अस्तित्व का अंत।
मृत्यु भी हमारी रची गई है एक ग्रंथ।

#death#thoughts#flowers#yqbaba#yqdidi

19 NOV AT 15:45

In the journey of finding myself, it was my scattered dream that joined and paved the way for my success.

#Join#yqbaba#pic credit: google

18 NOV AT 22:17

उफ़ ये हवाओं का झोंका,
जो तेरे मस्तक पर लहराती बालों की पत्तियों के साथ खेल रहा था,
वो मेरे इस बेबस हाथों पर हंस रहा है।

उफ़ ये हवाओं का झोंका,
जो तुझे ताजगी प्रदान करता था,
वो मुझे तूफान के झटके नसीब करा रहा है।

उफ़ ये हवाओं का झोंका,
जो कभी मेरा न हो सका,
वो आज तुझे भी जड़ों से उखाड़ रहा है।

#love#yqbaba#yqdidi

16 NOV AT 9:17

मेरा और उसका रिश्ता कुछ ऐसा था।
वो मिठी चाय और मैं कड़वा कॉफ़ी सा।
वो चमकती नदी और मैं तेज़ सूर्य किरण सा।
वो तुलसी की पत्ती और मैं वीक्स की गोली सा।
वो चिलचिलाती धूप में काली बादल और मैं वो सूरज, जो इस बादल को दिल दे गया।

#Life#yqbaba#yqdidi

15 NOV AT 10:14

बचपन की शरारत से शुरू हुई जो जिंदगी,
आज मायूसी की दौर पर चल रही।
वो नादानगी, जो कभी हमारे साथ चला करती थी,
आज यादों के महुप्याले में मिल गई।

घोड़े पर सवार हो निकलने का जोश,
आज सहमी पानी सा जीवन चाह रहा।
जो हथेली कभी गुड्डा गुड्डी की खेल खेला करती थी,
आज अपने सपनों के साथ खेल रही।

अंजान था मैं की मकान बनाने का सपना,
आज मकान को घर बनाने में बदल जाएगा।
पता ना था, बचपन का रसोई घर,
आज कैदखाने में बदल जाएगा।

नादान था ये दिल, जो रेत में अपनी जिंदगी लिखा करता था,
आज जब होश आया तो पता चला , की मुट्ठी भर रेत सी उसकी जिंदगी हो गई।
कभी जो लफ्ज़ सवालों की माला बुन दिया करते थे,
आज हां में हां मिलाने से नहीं थकते।

जो लोग कभी सच का साथ नहीं छोड़ा करते थे, आज झूठ को भी सच मान चले हैं।
जो पहले छोटी छोटी पहेलियों को सुलझाने में ख़ुशी ढूंडा करते थे, 
आज खुद उलझनों के पहाड़ के नीचे दबे हैं।

#All about life#yqbaba#yqdidi

12 NOV AT 23:13

He: How love tastes like?
She: I Believe in Feeling It and 
Not on Discarding after Tasting It.

#Taste#yqbaba

11 NOV AT 7:54

जिस बेरहमी से हमने,
हवा को शुद्धता में बदलने वाली मां को कुचला था,
आज उसी बेरहमी से,
प्रदूषित हवा का सफेद चादर,
हर पल हमारी सांसें ले रहा।

#Air#yqbaba#yqdidi

10 NOV AT 7:47