Bhavini_ Kushwah   (vineeę👒)
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Joined 4 August 2018


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Joined 4 August 2018
Bhavini_ Kushwah 6 APR AT 3:01

यह रात भी
जागी सी हैं
आज फिर आँखों में
नमी सी हैं

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Bhavini_ Kushwah 20 MAR AT 13:29

कम-ज़र्फ सी हुँ मैं
अनजान भी दुनिया से
मुतासिर हो फिर कैसे
खुशनुमा लम्हात मुझे

इतराज़ नहीं हैं
बावजूद किसी से
क्योंकि इम्तिहान जिंदगी का हैं
इनकार करू मैं कैसे

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Bhavini_ Kushwah 14 MAR AT 21:43

भीड़ से अलग हुई
तब जान पाई
अहमियत अपने अस्ल की

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#अस्ल = मूलतत्त्व
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#भीड़ #अहमियत
#life #lesson

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Bhavini_ Kushwah 13 MAR AT 10:40

वो दोस्ती यारी
शरारतों भरी
वो बचपन की खुमारी
याद बहुत आती हैं मेरी
सखियाँ और पक्की सहेली
खेली जिनके संग में होली
हो गई अब हर दिवाली सूनी
थी कितनी सुकून भरी
वो मासूम सी जिंदगी
उन बेपरवाह सपनो की पहेली

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Bhavini_ Kushwah 7 MAR AT 21:19

जिंदगी-ए तू थम जा ज़रा
यूँ कर न सितम तू थम जा ज़रा

थक गयी हूँ मैं
इन राहो मैं
चलते चलते
कुछ मेरा भी कर ख्याल
तू थम जा जरा

अपने जज़्बातो पर पूरा, इख़्तियार हैं मेरा
भटकूंगी नहीं राह से , ये वादा हैं मेरा
राहो के उन फूलो को मैं बस छूकर ही आ जाऊँगी
तेरे काँटों भरे उन रास्तो पर फिर चलने लग जाऊँगी
जानती हूँ मैं वो सुख क्षण भर का हैं
रास्तो को तेरे मेरी मंज़िल तक जाना हैं

वो क्षण भर का सुख
मुझे जीने तू दे ज़रा
जिंदगी-ए तू थम जा ज़रा

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Bhavini_ Kushwah 2 MAR AT 0:20

कुछ किस्से थे अनकहे
कुछ मुलाकाते थी अधूरी
अब पूरे हो रहे हैं
इक तेरे आ जाने से...

कुछ हम भी थे अधूरे
कुछ तुम भी थे अकेले
अब दोनो सिमट रहे हैं
इक तेरे आ जाने से.....

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Bhavini_ Kushwah 26 FEB AT 9:10

इन दिनों.... मैं कुछ कम लिख रही हूँ
शायद दिल की तरह मेरे ख्याल भी सख्त होना सीख गए हैं....🖤

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Bhavini_ Kushwah 20 FEB AT 23:02

क्यूँ सूरज संग हैं रात अंधेरी
चाँद भी तके
बाट अब तो तेरी
रिश्ता तो हैं तूझसे सच्चा मेरा
फिर क्यूँ भर आए दिल ये मेरा

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Bhavini_ Kushwah 18 FEB AT 14:09

वो मज़हब नहीं सिखाता
यूँ जिस्म ज़ार ज़ार करना
क्यूँ उन बुज़दिलो ने चाहा
मज़हब से इंसानियत का इमान मिटाना

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Bhavini_ Kushwah 17 FEB AT 13:34

ये सुहानी हवाएं
फिर मुझे छेड़ रही हैं
शायद ,
किसी हसीन इश्क का
पैगाम दे रही हैं

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