Beena   (Been A Mystic)
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Joined 28 May 2018


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Joined 28 May 2018
Beena 37 MINUTES AGO

प्रेम केंद्र में होता है
और बिखेरता है
रंग और रश्मि पुंज ..

लेकिन , केंद्र में
स्व उपस्थित हो जाता है ..

दिशा बदल जाती है
इसी लिए , दशा भी ..

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Beena 10 DEC AT 12:31

जितना सुंदर ईश्वर , उतनी ही सुंदर , उनकी विध विध रचनाएं।
Read in caption 😊

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Beena 10 DEC AT 10:15

बिछड़ना कितना मुश्किल होता है ना
असंभव ही कह लो मेरे लिए तो ...

प्रखर प्रेम होते हुए भी
फिर मैं पत्थर सी बन जाती हूँ
हृदयद्रावक पीड़ा कण कण तोडती है ...

प्रेम लेकिन संग्रहित रहता है
हृदयतल के भीतरी कोने में
चुपके से बहाए हुए आँसू से
फिर फूल उग जाते है .. प्रेम के

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Beena 10 DEC AT 7:30

हिम अंश चंद्र जब पूर्ण तेजोमय होता है
प्रातः भोर की उषा दस्तक देती है फिर
प्रकृति प्रखर सुंदर होती है ना तब , प्रिये।

Happy Birthday to ..
Himanshu , Usha & Priya

Kindly check the dates in caption

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Beena 9 DEC AT 19:43

ज़ेहन-ओ-दिल अगर बसीरत हो
तीरगी कैफे-नूर देती है
जीस्त की राह में हर-इक ठोकर
जिंदगी का शऊर देती है
हादसाते-हयात की आँधी
हस्बेफीक रास आती है
तेज करती है सोजा-अहले-कमाल
नाकिसों के दिये बुझाती है
इंतकामे-गमो-अलम लेंगे
जिंदगी को बदल के दम लेंगे
मर गए तो कजाए-गेती के
जर्रे-जर्रे में हम जनम लेंगे
जिंदगी में न कोई गम हो अगर
जिंदगी का मजा नहीं मिलता
राह आसान हो तो रहबरों को
गुमरही का मजा नहीं मिलता

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Beena 9 DEC AT 14:40

अब जब की हमने चाँद तक छलांग लगा ली है
और छू आए हैं
तलहटी भी विशालतम समुद्र की

कितना दुर्लभ है यह
कि किसी क्षण ईश्वर बिना कुछ बताए...
चुपके से हमारे भीतर झाँके...

और उसे भीतर
मुस्कुराता हुआ ईश्वर मिले....

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Beena 9 DEC AT 10:38

तार्किक तद्रूप से बनी
क्षणिक काया
और सोच में रहती ' मैं '
सवाल लिए
जवाब किए
पर क्या ये तुम हो ?
इतनी बोझिल
इतनी विलंबित
शोर एक भोर
मुझ में ' ॐ '
जो फैलता मेरी ओर
सुगमता से
प्रखरता से
बिना सवाल जवाब के ।

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Beena 8 DEC AT 21:55

' मैं ' नाम का काँटा निकल जाए तो
परम आनंद की अवस्था मिल जाए।

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Beena 6 DEC AT 13:55

द्वैत से अद्वैत तक का सफर
अव्यक्त पीड़ा से हो के गुज़रता है।

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Beena 5 DEC AT 23:17

विवश है जन-मन शहर का , रंग दिखाने में यहाँ
तू जहां जहां से भी गुज़र ... प्रेम की प्रतिकृति रख दे !!

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