Arunish Ankit   (गुलमोहर)
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Joined 29 March 2017


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Joined 29 March 2017
Arunish Ankit 10 HOURS AGO

उसे दिखता है
वो जो आप देख नहीं पाते,
सड़कों से गुजरते पगडंडियाँ देखता है,
आसमानों में, खेत हरे-भरे, खेलता बचपन
सुखी-फटी जमीन, की नब्ज़ जाँचता है-
ऑफिस की खिड़कियों से पुकारता है वो
काले-घने बादलों को, वो जानता है, कि
थाली कंप्यूटरों से नहीं सजती और रोटी का
कोई कोड नहीं होता, शायद इसी वजह से
उसे दिखता है वो जो आप देख
नहीं पाते- क्योंकि जितनी समझ है उसकी
आप समझ नहीं सकते, जिन्दगी-
ऑफिस के दीवारों में नहीं
उन्हीं खेत-खलिहानों में
साँसें लेती है-जागती है।

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Arunish Ankit 26 JUL AT 2:24

अभी तो बहुत दूर है माँझी
मेरा किनारा-
जहाँ अरूण को सम्भाले हो
नदिया की धारा-
अम्बर गिरता हो, नीचे हो
धरा का सहारा-
जहाँ सब ही जीते हो और
कोई ना हारा-
अभी तो बहुत दूर है माँझी
मेरा किनारा।

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Arunish Ankit 22 JUL AT 23:14

"तुम राग में गाते रहो-
हम आज़ाद हैं,
स्वाधीन हैं,
किसी सच से मगर हम
आज भी वंचित हैं-
बहुत ही हीन हैं,
इन सब को भी तो आज़ादी
'आज़ादी'-सी मिलनी चाहिए!"
[पूरी कविता अनुशीर्षक में पढ़ें]

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Arunish Ankit 21 JUL AT 1:53

मुझे कुछ-कुछ मुझ-सा
ही लगता है,
बातों की एक तह है जिसमें
ज़ुबाँ से कुछ ना कहता है!

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Arunish Ankit 17 JUL AT 15:27

टुकड़ों में वो जीते हैं,
टुकड़ों में हम सीते हैं,
जीवन की भावनाएँ
कुछ खुशियाँ- चन्द आशाएँ-
कलम उठे या कुल्हाड़ी
दोनों टुकड़ों में खाते हैं,
दोनों टुकड़ों में पीते हैं-
कविताएँ या थाली-
टुकड़ों वाली।
[पूरी कविता अनुशीर्षक में पढ़ें]

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Arunish Ankit 12 JUL AT 2:43

"उधार बढ़ने लगा है,
मुस्कुरा दीजिए।"

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Arunish Ankit 6 JUL AT 16:43

"भइया को अच्छी कविताएँ/किताबें पढ़नी भी नहीं,
और भइया को 'निदा फ़ाज़ली' से गज़ल भी लिखने।
ऐसे कैसे चलेगा भइया!"

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Arunish Ankit 4 JUL AT 10:50

यहाँ कानून नहीं होता,
यहाँ मर्यादाएँ नहीं
नापी जाती,
किसी पर बंदिश नहीं
कैसी भी बंदिश नहीं,
जो मजबूत है
वो नरम गोश्त खाता है,
पहले भी
जो मजबूत थे
नरम गोश्त पर बस
उनका ही हक़ था,
आगे भी रहेगा,
कोरे वर्चस्व की लड़ाई,
और जीतता बाहुबल
यही है भीड़तंत्र।

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Arunish Ankit 1 JUL AT 0:08

"मैं हूँ तन्हा मगर फिर भी तुम्हारे साथ रहता हूँ,
मोहब्बत का यही फ़रमान पर हर बार सुनता हूँ,
तुझे ना हक़ है देखे तू कोई सपना मोहब्बत का,
मगर फिर भी मैं तेरे साथ के अरमान बुनता हूँ।"

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Arunish Ankit 29 JUN AT 1:00

"यह स्वराज
स्वराज नहीं।"
[पूरी कविता अनुशीर्षक में पढ़ें]

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