Ankit Verma   (अnkít vєरmα)
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Joined 18 October 2017


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Ankit Verma 8 HOURS AGO

मैने अक्सर किताबों में गाँधीजी के विचारों को देखा, पढ़ा और समझा है।
कक्षा पहली से कक्षा बारहवीं तक सिर्फ़ कांग्रेस और गाँधीजी को सुना है।
फ़िर कैसे दे दू वोट उन्हें, मैं! जिन्होंने मेरे "महात्मा गाँधीजी" को मारा था।
शर्म से सर झुक जाता है जब मेरे अपनो ने, उन्हें मारने वालों को चुना है।

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Ankit Verma 9 HOURS AGO

आज जो तुम 'छप्पन इंच' की छाती लिए घूमते हो मोदी।
वो कांग्रेस पार्टी के 'गाँधी' और बाकी शूरवीरों की देन है।
तुम जैसे ही होंगे सीने पर चलाने वाले गाँधीजी के गोली।
बेरोज़गारी, अत्याचारी अपनी चरम सीमा पर तेरी देन है।

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Ankit Verma YESTERDAY AT 22:14

बैठ अकेले कमरे में, उस के हाथ में लगे, वो गुलाल को याद रखना।
अगर नही लगाया होगा उसने गुलाल तो उसके हाथ को याद रखना।
बहुत मिले होंगे तुझे ग़ालिब भगवा लगाने वाले आज हर चौराहें पर।
मगर वोट देते वक़्त उस रंग को पकड़े बापू के हाथ को याद रखना।

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Ankit Verma YESTERDAY AT 21:53

राहुल गाँधी जीते या नही जीते। 'अमेठी' हारे या नही हारे।
मगर स्मृति ईरानी जैसी अगर जीतती है तो हँसी आती है।

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Ankit Verma 17 MAR AT 23:44

दिल हाथ में रख, लिफ़ाफ़े में बंद कर, मैंने भेजी थी उसे चिट्ठियाँ।
पढ़ी नही.. उस हसीन ने, "कोरा कागज़" समझकर, मेरी चिट्ठियाँ।
फ़िर लिखना चालू किया मैंने, न जैसे कभी लिख सकी चिट्ठियाँ।
मगर आज भी है यहीं, उसकी हथेली न छू सकी कुँवारी चिट्ठियाँ।

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Ankit Verma 17 MAR AT 22:56

एक उम्र चाहिए ग़ालिब फिर इश्क़ करने के लिए।
क्योंकि शब्दों का हमारे! उसने बीमा करा रखा है।

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Ankit Verma 16 MAR AT 18:08

कोई इश्क़ सा मिलता क्यूँ नही इस जहाँ में ग़ालिब?
क्या मैं "अकेला" सा हूँ या फिर वो "अकेली" सी है?

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Ankit Verma 16 MAR AT 13:32

सुना है सच्ची मोहब्बत नसीब वालों को मिलती है।
मगर 'अवि' नसीब सच्ची मोहब्बत से नही मिलता।

धैर्य, आत्मविश्वाश तो लगभग सब के पास होते है।
मगर 'अवि' हुनर सड़क की दुकान पे नही मिलता।

अच्छा दिखना अच्छा सोचना तो सब को आता है।
मगर 'अवि' अच्छा बोलना हर होंठ पे नही मिलता।

कमल का फूल चाहे कितना भी पूजनीय क्यूँ न हो।
मगर 'अवि' गुलाब का फूल कीचड़ में नही खिलता।

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Ankit Verma 16 MAR AT 0:11

हर वक़्त ख़यालों में तुम ही।
क्या? "बेरोज़गारी" हो तुम?
हर वक़्त मेरे सायो में तुम ही।
क्या? "आज्ञाकारी" हो तुम?
हर एक की आँखों में तुम ही।
क्या? "इच्छाधारी" हो तुम?
हर एक की साँसो में तुम ही।
क्या? "शाकाहारी" हो तुम?
हर किसी के नाम में तुम ही।
क्या? कोई "बीमारी" हो तुम?
हर किसी के जाम में तुम ही।
क्या? "ईमानदारी" हो तुम?

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Ankit Verma 15 MAR AT 0:35

वो पूछते है हमसे! ना आजकल दिखते हो? ना लिखते हो?
इश्क़ की गलियों में क्या आज भी तुम आवारा बिकते हो?
हमने सोचा! समझा! फिर कहाँ उनसे ! यह सब तो ठीक है।
लेकिन आपको कभी यहाँ देखा नही ! वैसे आप कौन हो?

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