530
Quotes
3.5k
Followers
14.0k
Following

Ankit Verma (अnkít vєरmα)

read more
Ankit Verma 10 JAN AT 16:36

चोट खाये कवि तो इस जहाँ में बहुत है अवि।
मगर तब भी कवि! कवि से प्यार नही करता।

-


73 likes
Ankit Verma 4 JAN AT 20:07

गलती का वक़्त भी गलत था! गलती में वो "शख्स" भी गलत था।
तुम जो निकले थे किसी की चाह में, चाह में हमराह भी गलत था।
मगर फ़ायदा मिले तो सब सही, ग़र कोई फ़ायदा उठाये तो गलत।
मान लो की उस माह में, तेरी राह का लिया हर फैसला गलत था।

-


Show more
78 likes · 10 comments
Ankit Verma 4 JAN AT 18:36

नये साल में शब्दों का प्रारंभ कुछ इस तरह से करते है।
आप शीर्षक बताओं, हम शब्दों को पंक्तियों में भरते है।

-


Show more
65 likes · 4 comments
Ankit Verma 30 DEC 2018 AT 10:35

बैठे बैठे बन्द कमरे में चल आज फिर उस दिन की शुरुआत देखते हैं।
जब पहुंचे थे पहले दिन कॉलेज! सबसे पहले अपनी क्लास देखते हैं।
दोस्त बनाने के लिए! अपनी क्लास में! चल किसी का साथ देखते हैं।
प्रोफेसर ने लिए, सभी के इंट्रो की बात देखते हैं! चल ख्वाब देखते है।
दोस्त से बोला, पहला शब्द! चल यार अपनी पहली किताब देखते है।
नज़र जब घूमी अपनी दाई ओर उस लड़की के कोमल हाथ देखते है।
हो गया जो इश्क़, फ़िर उसके नैन देखकर! वही पहला प्यार देखते है।
ख्वाब कुछ ज्यादा ही लंबा है! कैंटीन में, चल कुछ खानपान देखते है।
वो उसका मेरी तरफ़ चले आना, के ख्वाब में भी लोग ख्वाब देखते है।
आपकी बुक! क्लास में ही छूट गयी थी! वो बोलती मुस्कान देखते है।
वो उसको हमारा शुक्रिया! पसंद आने का! अंदाज़-ऐ-बयान देखते है।

-


Show more
80 likes · 2 comments
Ankit Verma 29 DEC 2018 AT 18:07

यूँ तो हमे शुरुआती दौर में हमारे लोगो ने ही बोलने नही दिया।
मगर आज हमारी कलम के सामने किसी के बोलने की ताकत नही।
चुप हो जाते थे जब कोई हमे समझाता था की यह चीज़ कैसे करना है।
आज हम जो कहदे उसके बाद किसी को हमे समझाने की हिमाक़त नही।

-


77 likes · 4 comments
Ankit Verma 29 DEC 2018 AT 13:32

अपनों से कितना भी तुम पराया क्यों न हो जाओ।
मगर परायो से तुम कभी भी अपने नही हो सकते।

-


85 likes · 5 comments · 2 shares
Ankit Verma 28 DEC 2018 AT 22:08

जितनी कशिश उनको देखने में नही होती थी।
उससे ज्यादा कशिश उनपर अब लिखने में है।
वो तो भूल गये हमे कुछ, फिर मिलेंगे कहकर।
मगर उनकी यादों के कागज़ अब बिकने में है।

-


Show more
68 likes
Ankit Verma 28 DEC 2018 AT 12:20

धूप! इश्क़ पर पड़ी तो इश्क़ और रंगीन हो गया।
जिसे भूल गया था फिर उस संग संगीन हो गया।

-


83 likes · 3 comments · 5 shares
Ankit Verma 27 DEC 2018 AT 22:14

"ग़ालिब" के शहर "आगरा" में तो हम पैदा नही हुए जनाब।
मगर ताल्लुक हम भी नवाबों के शहर 'भोपाल' से रखते है।

-


Show more
59 likes · 7 comments
Ankit Verma 27 DEC 2018 AT 20:39

ग़ालिब ही इश्क़ है! इश्क़ ही ग़ालिब है!
हम तो, दरिया है! ज़रिया ही ग़ालिब है!

-


Show more
85 likes · 2 comments · 3 shares
YQ_Launcher Write your own quotes on YourQuote app
Open App