Ankit Bhadouria   (अक्स)
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Joined 6 February 2017


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27 OCT AT 8:02

इस से पहले तो कोई कुछ भी बुला लेता था
नाम सा नाम हुआ तुमने पुकारा जब से

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22 OCT AT 7:19

ये सितारे, चाँद, नीला आसमाँ सब वह्म है
बस फ़रेबी आँख है इक रौशनी ओढ़े हुए

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21 OCT AT 7:38

नदी की लय पर थिरकती किरनें
हवा की धुन पर चहकते पंछी

जो सुब्ह आँखों को ये मनाज़िर
दिखे तो जैसे मचल उठा दिन

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20 OCT AT 8:35

पढ़ूँगा मैं वो लिखा करेगी
ख़त-ओ-किताबत हुआ करेगी

चिराग़ मैंने जला दिया है
जो अब करेगी हवा करेगी

बिछड़ के मुझसे वो एक पागल
न जाने क्या-क्या किया करेगी

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16 OCT AT 8:53

तेरे वास्ते क्या ये काफ़ी नहीं है
कहीं ज़िन्दगी थी गुज़ारी कहीं है

नज़र वो तेरी जिससे था दिल परेशाँ
'नज़र' हमने अब तक उतारी नहीं है

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12 OCT AT 15:37

या'नी कहीं इलाज-ए-ग़म-ए-आशिक़ी नहीं
या'नी कि इस शजर का तअ'ल्लुक नदी से है

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22 AUG AT 18:16

बरगद के साये में अक्सर
छोटे पौधे मर जाते हैं
तू मेरी उदासी ओढ़ लिया कर
दुःख को कम करने के लिये

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9 AUG AT 19:41

घुमावदार ढलवाँ रस्ते - सफ़र का
किसी का न लौटना - इंतज़ार का
बिस्तर-ए-मर्ग पर
अरसे से पड़ा शख़्स - मौत का
दुःख कम कर देते हैं...

आहिस्ता-आहिस्ता ख़त्म होना
ख़त्म कर देता है
ख़त्म होने वाली हर शै का दुःख

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16 JUN AT 17:19

دل کو بچہ رہنے دے
تھوڑی سی نادانی رکھ

موت پہ ہنسنا ٹھیک نہیں
آنکھ میں تھوڑا پانی رکھ

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15 JUN AT 23:24

तमाम रंग थे जीवन में जिसके होने से

वो शख़्स अब भी है बाइस मगर उदासी का

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