Ananya Pandey🥀  
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Likh leti hu dil ki baaten,dil tk pahunch jae bs💜
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Joined 28 September 2018


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12 HOURS AGO

राहें वही हैं और मंज़िल तू ही,
दिल है परेशान जिसकी धड़कन तू ही,
गुज़री फ़िर उन राहों से हूँ आज जहाँ,
मिली मेरी साँसों को वो नमी तू ही,
आवारी कह लो या बंजारी भले,
मैं रुकूँ जिसकी खोज में वो रोशनी तू ही,
मेरी बातों में छिपे राज़ को,
मेरी आँखों में दिखते इश्क़-ए-साज़ को,
मेरे हर कदम चलते ,हँसी के आग़ाज़ को,
जो वज़ह मिले, जो हर बार मिले, वो प्यार तू ही!!
मेरा यार तू ही!!

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4 AUG AT 20:21

हर बात मुझसे जुड़ी, कर रही है सवाल आज,
बदली हूँ मैं, तो बदल रही क्यों रिश्तों के मायने आज।

जग भी ठहरा देखता हर पहलू लाज़मी बीच हमारे,
दर्द-रुख़सत देकर मैं क़ातिल ठहरा देती तुम्हें आज।

ख़ामियों की शौक़ीन हूँ, पर आँसुओं से लगाव नहीं,
गिरेबां में ख़ंजर लिए,चाहती हूँ प्यार की बरसात आज।

तुम इश्क़ मुक़म्मल करते हो,हम इश्क़ की तौहीन,
तुम्हें हसरत है मेरी खुशी,मैं देती सिर्फ़ ग़मों के सौग़ात आज।

मैं ना देखूँ उस जहां को,जहाँ तेरी आहटें ना मौजूद हों,
मोहब्बत भी और दिल पर वार भी,सच,बदलना है और आज।

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27 JUN AT 21:03

मर कर भी हम दिलों में जिया करते हैं,
ऐ ज़िंदगी! तुझसे ज़्यादा शोहरत तो मौत ने दी है।

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17 JUN AT 20:45

ना मोड़ कहीं ,ना कोई साया है,
मंज़िल तो है, पर चकाचौंध की एक काया है,
मैं मिल चली ख़ैर एक नदी बन,
कि कम-से-कम सागर में रोशनी की छाया है।

तबीयत वो पूछते हैं,कि खाना खाया है?
सिसकियों ने पेट भर,खुले आसमाँ में हमें सुलाया है,
मैं सुन चली ख़ैर एक दीवार बन,
कि ख़ामोशी में ही मैंने सुकून को पाया है।

कैफ़ियत जो पूछना,तो पूछ हमें सताया है,
बेमक़सद की ज़ुस्तजू ये,अपनी ख़ैरियत से हमें ललचाया है,
मैं उड़ चली ख़ैर एक पतंगा बन,
कि जल जाऊँ तो भी इन्होंने जश्न ही मनाया है।

आरज़ू हर जिस्म छूने की,बस एक मोह-माया है,
आज तक मेरे बदन को घूर कर इन्होंने सेंक आँखों को दिलाया है,
मैं मर चली ख़ैर एक रूह बन,
कि ज़िंदा होकर भी ख़ुद को आग में झुलसता पाया है।

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14 JUN AT 18:11

कुछ अनकहे ज़ख़्म दिल में क़ैद रहते हैं,
खिड़की है ना कोई,बस अंदर ही अंदर सहते हैं,
न दरवाज़े पर दस्तक़ है, न ही खोलने की हिम्मत,
बस कुछ चंद चेहरे ही झिलमिलाया करते हैं।
चोट हो कोई तो आह सुन ख़ुद को सहलाया ,
पर चेहरे पे शिकन की लकीर ना लाया करते हैं,
हाँ, कह लो मुझे कि हम आहत हैं,
कह लो कि दुनिया से छुपाया करते हैं,
ख़ैर, ख़ैरियत तो सही ही है हमारी,
यक़ीन करो, मुस्कुराहट से तुम्हें ग़ुमनाम करेंगे,
के यही अंदाज़-ए-ज़िन्दगी हम जिया करते हैं।

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12 JUN AT 12:21

दफ़्न हर उम्मीद हुई, ज़िन्दगी की लाश लिए
वो निहार रहा था मुझे, साँसों की आस लिए।

सोया जिसकी गोद में , वो बैठी सर गोद लिए
फ़िर जन्म देगी मुझे ,मेरी औलाद पालने की प्यास लिए।

आँखें पूछ रहीं कई सवाल, पानी का सैलाब लिए,
मैं तो हूँ यहीं, आँगन की तुलसी का आकार लिए।

आना नीचे प्राजक्ता के पेड़ के, घर की बाड़ी में जो है खुशबू लिए
इशारा कर कहूँगी उससे ,बरसाए वो फूल तुमपर,
ये मेहेरबानी करेगा वो भी इस तुलसी के लिए।

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29 MAY AT 20:27

मेहताब सा तू, रात में सवेरे सा,
पतंगे सी तुझे चूमने की मैं आस रखूँ।

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27 MAY AT 20:29

कुछ दर्द वक़्त के हाथों में रख दिए,
सवाल पूछा उसने तो,मुँह फ़ेर हम आगे बढ़ गए।
धूप कड़ी थी,और पेट ख़ाली,
फ़िर भी पसीने में लिपटकर घर की ओर चल दिए।
वक़्त पूछता रहा कि "उस ओर क्या है,जो तुम्हें शक्ति दे रहा",
मुस्कुराकर मैंने, माँ-बाबा और बच्चों के चेहरे दिखा दिए।
बीमारी और महामारी की क्या मज़ाल जो मुझे रोक सके,
हम तो मजदूर हैं साहब! बीवी के आँसुओं को पोंछने चल दिए।
दिन की दो रोटी को कमाते थे दूर देस में,
अब बस घर पहुँच जाऊँ, इस आस से रोज़ अपना पेट भर लिए।
मर मर कर जीना होता वहाँ, न खाना न ठिकाना ,
ज़्यादा ऐश-ओ-आराम नहीं,बस घर की छत हो,यही सोचकर हम यूँही पैदल चल दिए।
गाँव में सब पूछते हैं,की बेटा कहाँ है अब,
बाबा कहते हैं,"दूर देस गया है हमरे घर को पालने के लिए,आता ही होगा,बेचारे ने पैसों के लिए अपने पैर भी छिल दिए।
हम नहीं जानते कि ये बीमारी कितनों को मारेगी,
पर न जाने कितने भूखे पेट अपने परिवार के लिए क़ुर्बान हुए।

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20 MAY AT 13:38

जो पढ़ लिया तुम्हें तो कहीं दिल तोड़ तो न जाओगे?
उन पुरानी किताबों की तरह अपने रहस्य से झंझोड़ तो न जाओगे।

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15 MAY AT 10:59

मिलना भी होगा ज़रूर, फ़िल्हाल तस्वीर से तेरी दिन ये बिता रहे,
बेचैन हो रहे आप, और हम मुस्तक़बिल के सपने हैं सजा रहे।

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