मेरी कलम से... आनन्द कुमार  
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शब्दों से कुछ-कुछ कह लेता हूं...
Joined 10 April 2018


शब्दों से कुछ-कुछ कह लेता हूं...
Joined 10 April 2018

सरकार चलानी आती नहीं, तो सरकार बनते ही क्यों हो,
जो सपने पूरे नहीं कर सकते उसे, बुनते ही क्यों हो।
किसी जनप्रतिनिधि का बेटा नहीं देखा ऐसे मरते हुए,
सच बताओ नेता जी, बार-बार जनता को छलते क्यों हो।

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मुट्ठी भर बीमार पर, इन्तेजाम नहीं है,
वे मौत के मातम में, बदनाम बहुत हैं।
कहने को तो खुद को, सरकार हैं कहते,
अपनी ही व्यवस्था से, परेशान बहुत हैं।

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तुम तो पत्थर हो, तुमको क्या असर पड़ता है,
मैं तो मोम हूँ, हर बार पिघल जाता हूँ।

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गलती भी कर रही है,
और फैसला भी सुना रही है...

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मुहब्बत में तकलीफ़ कब दी, यह बता दो,
रिश्तों में चोट कब दी, यह भी बता देना।
बदनाम जो किए, हर मोड़, हर लम्हे तुम,
क्या यही है वफा की रीति, समझा देना।
नासमझ बनके, लुटते रहे हर पल तुम,
मेरी ईमानदारी व वफादारी के हिस्से को।
मुझे खुद का "हिस्सा" ना बना सके तुम,
"किस्सा" क्यों बनाए, बस इतना समझा देना।

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मेहनत के पैसे का बन्दरबांट हो गया,
बदनाम भी हुआ और बेकार हो गया।
मेरे भविष्य के साथ खिलवाड़ हो गया,
इश्क के नशे में ऐसा हाल हो गया।
वे समझेंगे क्यों, आखिर जरूरत क्या है,
जब आनन्द ही उनका दुश्मन यार हो गया।

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मुझसे जो मुहब्बत किये थे, वह सच था,
या आज जो मुहब्बत कर रहे, वह सच है।
सच कह रहा हूं, बस सच बतला देना,
कि तेरे दिल का क्या, असल सच है।

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रोऊं, हंसु या गुनगुनाऊं मैं,
तेरी मुहब्बत का गीत किधर से गाऊं मैं।
यकीन नहीं होता, तेरे नए प्रेम पर,
यह विजय है तेरा, या तेरा आनन्द समझूं मैं।

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ट्विंकल...
नमन् नमन् नमन्

आरोपी को जितनी कड़ी से कड़ी सजा दी जा सके, दिया जाए।
लेकिन उन पुलिस वालों पर भी कार्यवाही सुनिश्चित हो जिसको ट्विंकल के परिजनों ने बतौर नाम शंका जाहिर किया था और आज उन्हीं को क्षत-विक्षत शव मिलने के बाद पुलिस गिरफ्तार कर अपनी कामयाबी दिखा रही है।

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मेरी सांस अटकी है, तुम्हारे लिए,
हमें प्यार के चन्द लम्हे, उधार दे दो।
जी सकूं कुछ पल, तेरे साथ मैं भी,
ऐसा हसीन पल, आखिरी बार दे दो।
कोई शिकवा नहीं, कोई शिकायत नहीं,
मुझे चन्द पल जिन्दगी का उधार दे दो।

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