मेरी कलम से... आनन्द कुमार  
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शब्दों से कुछ-कुछ कह लेता हूं...
Joined 10 April 2018


शब्दों से कुछ-कुछ कह लेता हूं...
Joined 10 April 2018

जब तक शरीर काम करने से मना न कर दे, तब तक घर के बुजुर्ग को घर के काम को संभालने देना चाहिए। अगर आप उनके योग्य होने के बाद भी उनके योग्यता का अनादर करेंगे और स्वयं को उनसे योग्य व अनुभवी समझेंगे तो, निश्चित ही आपके अभिभावक अस्वस्थ होंगे और आपका आंगन तरक्की नहीं करेगा।

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बात अभिभावकों की...

अपने राजनीति के पैमाने में, बुजुर्ग को टिकट तो नहीं दोगे जनाब, कोई बात नहीं,
इसी लगे यह भी बता दो, तुम्हारे दल को बुजुर्गों का वोट चाहिए की नहीं चाहिए।

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नेहरू युग के शास्त्री के बाद मोदी युग के शास्त्री थे पर्रिकर
शत् शत् नमन्...

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मजबूर न करना मेरे देश को, जनसंख्या 01 सौ 30 करोड़ है और भगत सिंह, चन्द्रशेखर आजाद लाखों...
जय हिन्द, जय जय अभिनन्दन

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ऐसी शक्ति हमें दो ना दाता, की मन का विश्वास कमजोर हो न,
भारत के दुश्मन को ऐसे मारे सेना, की फिर कोई पुलवामा हो न।

सेना तुझे सलाम।

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हे गंगा मां संगम में हमारे पीएम मोदी जी डुबकी लगाने आने वाले हैं, कृपया आप उन्हें इतनी ताकत देना की वे आतंकवाद व पाकिस्तान दोनों को नेस्तनाबूद कर दें।

जय हिन्द, जय भारत

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क्यों न चुनाव लड़ने वाले हर नेता के बेटा या भाई को पहले अनुकंपा के आधार पर सेना में भर्ती दे दिया जाए, फिर चुनाव लड़ने दिया जाए ?

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देखो ना, तुम नहीं हो,
तुम्हारी यादों के सहारे,
पल-पल, तुम्हारे नाम को,
रोशन कर रही है,
तुम्हारी स्मृति।

बेटे के फर्ज को,
तुम्हारे संस्कारों के कर्ज को,
देखों ना कदमताल करके,
कैसे चुका रही है,
तुम्हारी स्मृति।

उम्मीदें संजो कर मन में,
दर्द है खूब समेटी,
फिर भी रिश्तों के बोझ से,
बिल्कुल ना घबड़ा रही है,
तुम्हारी प्यारी स्मृति।।

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मुसाफिर हूं,
कभी इस शहर,
कभी उस शहर,
चलता रहता हूं,
अपनो को दिल में,
हर बार संजोता रहता हूं।
सब कहते हैं छोड़ कर,
यादों को चला गया,
पर सच है यादों को संजो कर,
रखता रहता हूं।

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खेत लहलहाए अऊर बसंत मुस्कुराए,
देखा गंऊवा क माटी केतना नीक लागे।

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