AMIT RAI   (निश्छल)
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हाँ, यह सच है कि मेरे कोट्स की संख्या कभी-कभी कम भी हो जाती है।
Joined 8 January 2018


हाँ, यह सच है कि मेरे कोट्स की संख्या कभी-कभी कम भी हो जाती है।
Joined 8 January 2018
AMIT RAI 9 HOURS AGO

प्रेम पगे उनके नयनों सजि,
प्रश्न खड़े सखि हैं लहराते।
नेत्र चुरावत हैं अपने वह,
पूछि रहे तुमसे मदमाते।।
ओ सखि! क्या कह दूँ उनसे अब,
डूबि रहीं तुम भी दिन-राते?
जागि रहीं निशि-वासर सौतन,
ढूँढ़ि रहीं उनको शरमाते।।

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AMIT RAI 16 MAR AT 18:25

तरानों की बारिश आज फिर हुई,
आहत मन से
आवाज़ तो टप-टप ही आयी,
मगर रंग, सुर्ख़ था।

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AMIT RAI 10 MAR AT 19:39

मंज़रों को बेधकर उन्माद मन के
हो लिये बैरी परम, मेरे वहम के,
होश बीते वक्त का आया मुझे जब
दंश से आहत हुआ था मैं स्वयं के।

🍃

(Please, Read in Caption)

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AMIT RAI 9 MAR AT 10:19

जब चटख से रंग लेकर आ गये दिन नाथ गिरि पर,
टाप घोड़ों की उठी बन ज्वाल वर्णी ख़ाक बनकर।
कुछ छटा ऐसी दिखी थी प्रात में रविवार के, महि
प्राण सूखे शीत के जैसे निरख व्यालारि को अहि।
.
(○“हश्र” को अनुशीर्षक में पढ़ें○)

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AMIT RAI 7 MAR AT 19:15

मन्मथ के आदेशों पर जब,
सकल जीव विषयी होंगे,
मदनललित हों प्राणहीन जब,
तारे भी उदयी होंगे।
【...अनुशीर्षक में पढ़ें_】

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AMIT RAI 6 MAR AT 19:17

कौन सी...ऽऽऽ
🤔

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AMIT RAI 22 FEB AT 20:41

,

एक

मर्म

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AMIT RAI 20 FEB AT 19:04

कुपित चाँद था, बरस पड़ा
अपने दुर्व्यवहारों से,
आस लगी, तथा भानु को
टिमटिम करते तारों से।
(_अनुशीर्षक में पढ़ें...)

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AMIT RAI 19 FEB AT 19:27

दूर क्षितिज पर इक दरवाजा, अंदर रात अकेली;
निर्जन वन दुल्हा बन बैठा, दुल्हन नयी नवेली।
(अनुशीर्षक में पढ़ें)

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AMIT RAI 12 FEB AT 18:00

कवि! तुम डूब गये भावों में,

तिमिर हरेगा कौन?


(○अनुशीर्षक में पढ़ें○)

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