अमित   (निश्छल)
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हाँ, यह सच है कि मेरे कोट्स की संख्या कभी-कभी कम भी हो जाती है।
Joined 8 January 2018


हाँ, यह सच है कि मेरे कोट्स की संख्या कभी-कभी कम भी हो जाती है।
Joined 8 January 2018
अमित 22 HOURS AGO

नेह के किसलय खिलेंगे
खिल उठेंगे मन सहस भी,
धीर धरना अन्नपूर्णा
दीन के वंचित निलय में।
☯️
बेमुरव्वत को मेरी, मत
गैर समझो तुम सलोनी,
अंततः तुमसे शुरू हो
हो रहा तुममें विलय मैं।

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अमित 22 HOURS AGO

दीपशिखा...
इश्क सूरज से करूँ, या
चाँद को शौहर लिखूँ मैं,
कौन कहता, है बुराई
इन दुधारी पंक्तियों में?
दूर करने को अँधेरे
कांतिमय पृथ्वी बनाने,
अंततः शामिल हुई हूँ
सृष्टि की किंवदंतियों में।

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अमित 14 SEP AT 21:37

ऐसे मौसम में शरमाना
और पलक का बोझिल होना,
न्यौछावर मैं, इसी अदा पर
रखा सजाये दिल का कोना।
)अनुशीर्षक में पढ़ें(

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अमित 14 SEP AT 10:36

शिल्प मनोहर शब्द धरोहर
राष्ट्रप्रेम की बिंदी है,
भाषाओं का गौरव है जो
वही हमारी हिंदी है।

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अमित 14 SEP AT 9:21

राजभाषा दिवस की शुभकामनाएँ।

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अमित 12 SEP AT 19:38

आँसू,
उच्छृंखल मनोभावों के
शृंगार होते हैं।

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अमित 11 SEP AT 13:44

हँसता हुआ हर चेहरा, खुश नहीं होता।

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अमित 11 SEP AT 13:32

आँसू, दर्द के मापक नहीं होते,
न ही पीड़ा के प्रमाण।

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अमित 10 SEP AT 14:03

आज, केंचुल को बदल
निर्वस्त्र हैं संबंध सारे,
और मूर्छित हो चुके
सद्भाव भी विष ग्रंथियों से।
मृत्यु की चर्चा अधर पर
ब्रह्ममय पंडाल दिखते,
त्रस्त हो, सिहरा हुआ है
धर्म, अपने पंथियों से।

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अमित 9 SEP AT 23:58

आज मिटा हूँ मिटते-मिटते
साँसों की सरगरमी से,
पिघल चुका हूँ पानी जैसा
अपनों की हमदर्दी से।
कितने कदम और चलने को
दिया साँस ऐ ऊपरवाले,
लौ मद्धिम हो चुकी देख ले
मालिक, अपनी मरज़ी से।

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